SIGNIFICANCE OF 108

108 और 1008 का रहस्य / SIGNIFICANCE OF 108

हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार 108 और 1008 को बहुत महतवपूर्ण माना जाता है.

 

 

सूर्य के  diameter और चाँद के  diameter को डिवाइड करेंगे तो 108 आता है. पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी or पृथ्वी से सूर्य की दूरी को divide करेंगे तो 108 आता है है। यह दावा किया है कि वेदांत के महान प्रजनकों इस रिश्ते को जानता था और इस प्रकार Vedantic chantings में एक बहुत महत्वपूर्ण संख्या 108 है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार यहाँ पर 9 प्लैनेट्स और 12 राशि चक्र चिन्ह  है और जब ये 9 प्लैनेट्स 12 राशि चक्र चिन्ह के साथ परवाहन होते है तब ये 108 अलग अलग तरह के प्रभाव उत्पादित करते है!( अच्छे और बुरे). अंकज्योतिष के अनुसार 108 यानि 1+0+8 = 9 जो एक पूर्ण अंक है इसलिए  अगर  मंत्र  को 108  बार बोला जाए तो ये बुरे प्रभाव को नष्ट  कर देता है और  अच्छे प्रभाव उत्त्पादित कर देता है  (SIGNIFICANCE OF 108)

 

1008 का महत्व जानने के लिए युगास का पता होना आवश्यक है  (SIGNIFICANCE OF 108)

1 महीना मानव ज़िन्दगी के लिए – एक दिन स्वर्गीय आत्माओ के लिए (मृत व्यक्तियों)

1 साल मानव ज़िन्दगी के लिए – एक दिन देवास के लिए( इंद्र, वायु, अग्नि)

43,20,000 साल मानव ज़िन्दगी के लिए – 1 माह युग ( जिसमे कृतः , त्रिथा ,द्वापर, कलयुग)

7२   महा  युग   – 1 महावंतरा के लिए

14 महावंतरा – एक कल्पा जो आधा दिन है लार्ड ब्रह्मा का

इसलिए 14 महावंतरा * 72महायुग =1008 महायुगास

ये धारणा  है की सभी महायुग में एक ईश्वर है और हम सब एक ही आत्मा है जो बार बार जन्म ले रहे है.

 

 

हिन्दू धरम में देवी देवताओं के 108 नाम है और गौड़ीय वैष्णविज़्म में 108 गोपिया थी  ये कहा जाता है की 108 बार इन सभी नाम का वादन किया जाता था यानि नामजपन विवाह के दौरान होता है.

जैसा कि आप देख सकते है, चमत्कारिक वर्ग के बीचोबीच पांच का अंक है ! पांच सामान भुजाओ वाले पंचभुज को क्या कहते है ? एक नियमित पेंटागन ! लेकिन असली चमत्कार तो यही है… एक नियमित पेंटागन का प्रत्येक आंतरिक एंगल 108 डिग्री है.

 

 

हिन्दू धरम में देवी देवताओं के 108 नाम है और गौड़ीय वैष्णविज़्म में 108 गोपिया थी  ये कहा जाता है की 108 बार इन सभी नाम का वादन किया जाता था यानि नामजपन विवाह के दौरान.

माला में  मोती होते है  जिसका उपयोग 108बार नाम जपने के लिए किया जाता था.

 

 

आयुर्वेदा के अनुसार हमारे शरीर में 108 दाब बिंदु है जो मानव  को  ज़िन्दगी जीने की  चेतना देती है.

108 को  हिन्दू माइथोलॉजी में बहुत ही महत्वपूर्ण  माना गया है.

प्राचीन भारतीय गणितिज्ञो  ने इसकी खोज की थी जिसे चमत्कारिक वर्ग कहते है ! शून्य को छोड़ कर यह पहले नो अंको का तीन गुना का प्रबंद है.

“चमत्कारिक वर्ग की एक और प्रमुख विषेशता यह है कि उन विशेष वर्गों का निकल कर जिनका योग पचीस होता है, स्वस्तिक  बनाया जा सकता है ”

 

 

चमत्कारिक वर्ग का अदभूत गुण यह है कि वर्ग कि किसी पंक्ति, कॉलम या विकरण मई वर्ग का योग हमेशा में एक ही संख्या रहती है—पंद्रह

 

 

दोनों अंको 108  और  1008 को जोड़कर 9 (1+8) बनता है. अंकज्योतिष के हिसाब से 9 आखरी अंक है जो 1 से स्टार्ट होता है अब अगर 1 और 8 को देखे तो 1 का मतलब सेल्फ, ईश्वर, सूरज और प्लेनेट है.

उसी तरह 1 का मतलब स्पिरिचुअल लर्निंग और प्लेनेट सैटर्न  है , जो की सबसे पुराना प्लेनेट और निर्धारक है कर्मा का.

अगर आप अंक 8 को 45 डिग्री एंगल से देखे तो आपको ये इंफिनिटी सिंबल दिखाई देगा.

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